आम बजट पेश करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में बजट प्रावधानों की तफ्सील पेश की.
जेटली ने दावा किया कि ये पहला ऐसा बजट है जिसमें हर श्रेणी के करदाता को राहत पहुंचाई गई है. वित्त मंत्री के मुताबिक कर चुकाने वाले हर शख्स को टैक्स में सालाना 12.5 हजार रुपये की छूट मिलेगी. जेटली ने कहा कि सरकार का इरादा ईमानदार करदाता और मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा पैसा देना है. साथ ही वो ज्यादा लोगों को टैक्स के दायरे में लाना चाहते हैं.
जेटली ने माना कि टैक्स में छूट से सरकार को कुछ वित्तीय घाटा उठाना होगा लेकिन इसकी भरपाई टैक्स चोरी करने वाले लोगों पर शिकंजा कसकर की जाएगी. वित्त मंत्री ने दावा किया कि सरकार को छोटे कारोबारियों की ज्यादा चिंता है और बड़े उद्योगपति अपनी फिक्र खुद कर सकते हैं.
जेटली ने माना कि सरकारी बैंक बेड लोन की समस्या से जूझ रहे हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि बैंकों को उबारना एक धीमी प्रक्रिया होगी.
वित्त मंत्री का कहना था कि सरकार एक सीमा से ज्यादा पैसा बैंकों में नहीं डाल सकती. सरकार का काम सिर्फ नीति बनाना है और प्राइवेट सेक्टर को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.
इंटरव्यू के दौरान जेटली सियासी पार्टियों की फंडिंग पर अपने ऐलान को लेकर भी बोले. उनका कहना था कि बॉन्ड के जरिये चंदा देने की प्रक्रिया से कारोबारी बिना हिचक पार्टियों को चंदा दे सकेंगे और सियासत में काले पैसे पर रोक लगाई जा सकेगी.
वित्त मंत्री के मुताबिक GST बिल के प्रावधानों से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए खास फंड बनाया जाएगा. इस फंड में तंबाकू पदार्थ और लग्जरी गाड़ियों जैसे उत्पादों पर लगने वाले अतिरिक्त करों से पैसा आएगा.
जेटली का दावा था कि सरकार ने वाजपेयी सरकार के मुकाबले कहीं ज्यादा विनिवेश किया है और सरकार इस काम को खामोशी से आगे बढ़ा रही है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि सरकार अगले साल बीमा कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 74 फीसदी तक लाएगी. उनके मुताबिक नीति आयोग ने विनिवेश के लिए कंपनियों की लंबी लिस्ट तैयार की है और सरकार विनिवेश के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही है.
जेटली ने दावा किया कि ये पहला ऐसा बजट है जिसमें हर श्रेणी के करदाता को राहत पहुंचाई गई है. वित्त मंत्री के मुताबिक कर चुकाने वाले हर शख्स को टैक्स में सालाना 12.5 हजार रुपये की छूट मिलेगी. जेटली ने कहा कि सरकार का इरादा ईमानदार करदाता और मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा पैसा देना है. साथ ही वो ज्यादा लोगों को टैक्स के दायरे में लाना चाहते हैं.
जेटली ने माना कि टैक्स में छूट से सरकार को कुछ वित्तीय घाटा उठाना होगा लेकिन इसकी भरपाई टैक्स चोरी करने वाले लोगों पर शिकंजा कसकर की जाएगी. वित्त मंत्री ने दावा किया कि सरकार को छोटे कारोबारियों की ज्यादा चिंता है और बड़े उद्योगपति अपनी फिक्र खुद कर सकते हैं.
जेटली ने माना कि सरकारी बैंक बेड लोन की समस्या से जूझ रहे हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि बैंकों को उबारना एक धीमी प्रक्रिया होगी.
वित्त मंत्री का कहना था कि सरकार एक सीमा से ज्यादा पैसा बैंकों में नहीं डाल सकती. सरकार का काम सिर्फ नीति बनाना है और प्राइवेट सेक्टर को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.
इंटरव्यू के दौरान जेटली सियासी पार्टियों की फंडिंग पर अपने ऐलान को लेकर भी बोले. उनका कहना था कि बॉन्ड के जरिये चंदा देने की प्रक्रिया से कारोबारी बिना हिचक पार्टियों को चंदा दे सकेंगे और सियासत में काले पैसे पर रोक लगाई जा सकेगी.
वित्त मंत्री के मुताबिक GST बिल के प्रावधानों से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए खास फंड बनाया जाएगा. इस फंड में तंबाकू पदार्थ और लग्जरी गाड़ियों जैसे उत्पादों पर लगने वाले अतिरिक्त करों से पैसा आएगा.
जेटली का दावा था कि सरकार ने वाजपेयी सरकार के मुकाबले कहीं ज्यादा विनिवेश किया है और सरकार इस काम को खामोशी से आगे बढ़ा रही है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि सरकार अगले साल बीमा कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 74 फीसदी तक लाएगी. उनके मुताबिक नीति आयोग ने विनिवेश के लिए कंपनियों की लंबी लिस्ट तैयार की है और सरकार विनिवेश के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही है.


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